Category: हिन्दी कविता

ज़िंदगी एक गीत।

ज़िंदगी एक गीत,
                       कभी क्रोध कभी प्रीत,
ज़िंदगी एक गीत।

इसके सफ़र में, मंजिलें हैं कई,
होवे कर्म तो, है मंजिलों से मीत,
ज़िंदगी एक गीत,
                       कभी शुष्क कभी शीत,
ज़िंदगी एक गीत।

ज़िंदगी एक खेल, एक तमाशा है,
बदलते समय, बदलते समाज में,
इसकी सिर्फ एक परिभाषा है,
आज संघर्ष, कल हर्ष,
उत्कृष्ठ, उत्कर्ष अभिलाषा है,
ज़िंदगी एक गीत,
                       कभी क्रोध कभी प्रीत,
ज़िंदगी एक गीत।

ज़िंदगियाँ तमाम हैं,
कभी नामी, तो कभी गुमनाम है,
कर्मठ को जानी,
                      बस यहाँ भाग ही बदनाम है,
सुबह खुशी, शाम को गम,
तो कभी सुनसान है,
ज़िंदगी एक गीत,
                       कभी शुष्क कभी शीत,
ज़िंदगी एक गीत।

ज़िंदगी कभी ना खोती है,
हताशा में रोती, तो उम्मीद से खुश होती है,
कभी भ्रम में हार,
                       तो कभी जीत में छल है,
लेकिन कमबख्त कभी होती ना बंजर है।
ज़िंदगी एक गीत,
                       कभी क्रोध कभी प्रीत,
ज़िंदगी एक गीत।

ज़िंदगी एक कृति है, स्वयं की प्रकृति है,
जैंसा ढालेगा, ढलेगी,
जैंसा  सृजन, वो बनेगी,
मन-आकांक्षा, ह्रदय विशाल,
ज़िंदगी है एक समंदर,
                              तो है एक जाल,
ज़िंदगी एक गीत,
                       कभी शुष्क कभी शीत,
ज़िंदगी एक गीत।

ज़िंदगी एक खोज है,
स्वतंत्र की सोच है,
सम में तम,
               तो विषम में विशेष है,
ज़िंदगी में कभी तेज़,
                            तो कभी शांति है,
लेकिन मिटाती हर भ्रांति है।
ज़िंदगी एक गीत,
                       कभी क्रोध कभी प्रीत,
ज़िंदगी एक गीत,
                       कभी शुष्क कभी शीत।

Shubham Agnihotri