Category: Poetry of mind’s Tongue

माननीय जी आप कब आयेंगे?

माननीय जी सुना था आप भोपाल आ रहे हैं और उससे पहले मैं भोपाल हो आया। भोपाल देखकर लगा कि आपका आना तो बरदान है, प्रार्थना है आप हर दो-तीन महीने में आयें, अपना घर ही समझकर आयें क्योंकि घर तो स्वर्ग होता है और फिर स्वर्ग किसे पसंद नहीं होता। आप तो घर के मुखिया हैं और मुखिया तो मुखिया ही होता है कोई पागल तो है नहीं जो अपने ही घर ना आये।

लेकिन मेरी आप से विनती है कि आप केवल बड़ी बड़ी जगह ना जाएं, हमारे छोटे से अशोकनगर भी आएं। मैं तो कहूँगा आप हर छोटे शहर में जाएं, उन गरीब खानों से शहरों को भी अपना घर बनाएँ। आप अभी तो कुछ दिनों में भोपाल आने वाले हैं और भोपाल का तो मानो भाग्य चमक गया। बचपन में सुना था कि पहले के ज़माने में बड़े बड़े किले एक एक रात में बन जाते थे और आज आपके आने से तो रातों रात किला भले ना बना लेकिन सड़क जरूर डल गई। शायद माननीय जी को अपनी सवारी गाड़ी में चाय पीने का शौक होगा और चिकनी सड़क पर धचके लगते नहीं। हम गरीबों को तो सड़क पर चलने में और सफ़र करने में मौन रहना ही मुनासिब है, पता नहीं हम कुछ बोले और न जाने कब सड़क पर गड्डा आया और पता चला कि चर्चा की जगह अपनी जीभ चबा बैठे। इसलिये माननीय जी आप हमारे यहाँ भी आइये और हर साल आइये क्योंकि आज कल चप्पल से कम एक्सपायरी डेट तो सडकों की होती है। आप आते रहेंगे और सड़क चिकनी रहेगी और हम चाय भले ना पियें लेकिन चर्चा तो कर ही लेंगे। आपके भोपाल आने से लोगों का एक तबका बड़ा नाराज़ है क्योंकि जिन लोगों ने बड़ी मेहनत से सरकारी दीवारों पर लाल-लाल थूक-रंग से जो सुंदर आर्ट्स बनाये थे,उन्हें वॉल-पेंटिंग के नाम पर वेवजह पोत दिया गया। वो नाराज़ इसलिए भी नहीं कि दीवारों को पोता लेकिन वो दीवारें तो उनके अप्रत्यक्ष कर की प्रत्यक्ष निशानी थी।

माननीय जी शायद आप में कोई अलौकिक शक्ति है क्योंकि आपके आने मात्र की खबर से सब अधिकारियों में जोश आ जाता है, जो काम सालों में नहीं होता वो घंटों में हो जाता है। माननीय जी आप महान हैं क्योंकि आपके आने के डर से तो सड़क किनारे पेड़ पौधे अपने आप उग आते हैं और दूसरी जगह कम हो जाते हैं। कचरे का कोई नाम नहीं होता है मानो कचरा शब्द ही इस शहर ने ना सुना हो और पल भर के लिये मुझे लगा कि ये भोपाल नहीं है, शायद मेरा सपना है और फिर वो सपना भी टूट जाता है।

माननीय जी आप मेरे शहर भी आइये, आपका मन हो तो ना भी आइये लेकिन एक बार घोषणा कर दें कि आप मेरे अशोकनगर आयेंगे और फिर चाहे कुछ दिन बार इंकार कर दें। उससे आपका तो कुछ नहीं होगा लेकिन हमारे कुछ अच्छे दिन आयेंगे। हम भले ही कार में बैठकर चाय ना पियें लेकिन माननीय जी हमारे हाथ-पैर दर्द से बच जायेंगे।

   तो माननीय जी आप हमारे शहर, अरे मेरा मतलब अपने घर घूमने कब आयेंगे।

                                                                                                                                   धन्यवाद।

प्यासी भारत माता।

माता कभी कुछ नहीं बाँटती वो तो सब कुछ सबको देती है और बराबरी से देती है।
इस देश की धरती मेरी माता है, और मैं ही केवल इसका बेटा नहीं अपितु इसकी सवा अरब संतान और भी हैं? नहीं,इसकी धरती पर तो हर जीवित प्राणी इसकी संतान है, सारे जानवर और सारे पक्षी। इस माता ने हमारी प्यास बुझाई है, तो भूख भी मिटाई है और फिर हमारा तो मानो क़र्ज़ वापसी का कोई फ़र्ज़ ही नहीं है? आज तो हम अपनी माता को लेकर लड़ बैठे हैं कि ये मेरी है, नहीं ये मेरी है। और बेचारी माता का आधा शरीर प्यासा तड़प रहा है।
जब माता परेशानी में है तो बेटे खुश हो नहीं सकते? हाँ, हो सकते हैं क्योंकि बेटों ने तो माँ का बँटवारा कर लिया है और उसकी नसों को काटकर उनमे टाँके लगा दिये हैं। हमारी माता जो हरी चुनरिया ओढे हुए थी,आज धीरे धीरे उसके बेटों ने ही उतार ली।
      हाँ, माता चाहे कितनी भी बीमार हो गई हो इसकी परवाह नहीं है बस बेटे तो इस पर लड़ रहे हैं कि जयकार का उदघोष मैं करता हूँ और माँ की देखभाल तू कर?
तो दूसरा तो माँ को ही स्वीकार करने में संकोच करता है, माँ की देखभाल और जयकार तो दूर की बात है। मेरी माता के कुछ बेटे तो विवेक-अविवेक को कुछ ज्यादा ही अच्छे से समझते हैं, शायद इसीलिए वो उस माता को छलनी करके अपने सवारी के निर्जीव जानवरों की चमक दमक और शान में जल की जान लेते हैं।
कुछ बेटों को प्यास नही है क्योंकि कुछ गले कभी सूखते नहीं हैं लेकिन उन्हें शौक़ की प्यास लगती है तो वो हरी घाँस में अपनी प्यास बुझाते हैं, वो खुद ही कचरा कर उसे जल की बौछारों से हटाने में अपनी प्यास बुझाते हैं और उस जल के बहाने ही वो माता को चूस जाते हैं और फिर क्या? वो शौक़ रखने वाले इंसानों में कुछ जयकार लगाते भी हैं और कुछ नहीं भी और जो बेटे इन बेटों की भूख मिटाते हैं वो खुद ही भूखे-प्यासे रह जाते हैं। अब उनके सूखे गले से कहाँ से आवाज़ निकले लेकिन फिर भी वो उस माँ की सेवा करते हैं और उसकी जयकार लगाते हैं, आखिर माँ कैंसी भी हो वो है तो माँ ही। शायद ये बात केवल साधारण इंसान समझ पाते हैं, जो असाधारण हैं वो तो नारे लगवाते हैं चाहे बग़ावत के हों या समर्थन के। उनकी चालाकी ना हम और ना तुम समझ पाते हैं।
भारत माता की जय।
*जल संरक्षण क्योंकि पैसा कभी समंदर का पानी ना बन जाये,जो खूब है लेकिन प्यास ना बुझाए।

Summer’s Cold

My dreams seems life,life seems dream,

I jump,I slip,when walk through the clouds,

searching for MY Love’s pinkish cloud,

but I’m alone in this shadowy life,

Where Is MY heart?that is a kid,

beats in MY Romeo’s side,

So Please come here you,MY Angel,down,

wipe MY tears,make them pearl,

and I need your hold tight, all the night,

in this summer’s cold.

I chase MY shadow,MY shadow chases me,

laugh. I cry,when look into dense dark,

looking for My Love’s ruddy gleam,

but i don’t want golden throne, up in the sky,

i just want Rose, Rose of happiness and your smile,

So Please come here you,My Angel,down,

make these pebbles,a lovely crown,

and i need your hold tight, all the night,

in this summer’s cold..

My Angel

My Angel has flown,away,

but dropped his remains,golden rays,

he’s gone,made myself done,

done to ascend,in destiny’s lane.

Now don’t bewail,my greedy eyes,

his smile was an omen,for future sight,

you can’t see,too bright,

just show me the path that,i decide,

Now don’t vex me,my imbecile mind,

his wings was mentor,

lightened my way in-night,

you can’t conceive,too pristine,

just walk along,on my dawn’s plan,

Now don’t cry,my abysmal heart,

his shadow was a spirit,

erases my ignorance,of dark,

you can’t perceive,too adroit,

I Grab my luck,like palm in palm,

My angel has flown,away,

here his memories will last,

lasts when; I’m young,while flashes in grey,

My Angel has flown away.